भारतीय आदर्श शिक्षण समिति मंदसौर एवं विद्या भारती द्वारा संचालित सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय मध्य प्रदेश के मंदसौर शहर मे स्थित है। इस महाविद्यालय की स्थापना 27 जून 2005 को प्रशिक्षित शिक्षक तैयार करने के लिए की गई है। इस महाविद्यालय मे बी.एड़. एवं डी.एल.एड़. दो द्विवर्षीय पाठ्यक्रम संचालित है। बी.एड़. द्विवर्षीय पाठ्यक्रम एन.सी.टी.ई. (WRC) एवं मध्यप्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग भोपाल से मान्यता प्राप्त एवं सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन से संबंद्धता प्राप्त है। डी.एल.एड़. द्विवर्षीय पाठ्यक्रम एन.सी.टी.ई. (WRC) से मान्यता प्राप्त एवं माध्यमिक शिक्षा मण्डल मध्यप्रदेश भोपाल से संबंद्धता प्राप्त है।
सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय की स्थापना का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे संस्कारित, संवेदनशील और उत्तरदायी नागरिकों का निर्माण करना है, जो ज्ञान के साथ-साथ मूल्यों से भी समृद्ध हों। शिक्षा के माध्यम से संस्कृति का संरक्षण, मानवीय संवेदनाओं का विकास, समाज के प्रति सहयोग की भावना, पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व तथा खेलों को जीवन का अभिन्न अंग बनाना ही हमारे संस्थान की मूल चेतना है। हम गुरुकुल परंपरा की आत्मा को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ते हुए प्रशिक्षणार्थियों में आत्म-मूल्यांकन, अनुशासन और नैतिकता का विकास करने हेतु सतत् प्रयासरत हैं।
इस महाविद्यालय मे बी.एड़. एवं डी.एल.एड़. दो पाठ्यक्रम संचालित होते हैं। महाविद्यालय सह-शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत प्रशिक्षणार्थियों को समान अवसर प्रदान करता है तथा उन्हें आत्मनिर्भर और स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाने पर विशेष बल देता है एवं आने वाले समय में विभिन्न रोजगारपरक व कौशल आधारित पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाने की योजना है, जिससे प्रशिक्षणार्थी शिक्षा पूर्ण करते ही आत्मविश्वास के साथ रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें।
हमारा विश्वास है कि शिक्षा कक्षा तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसी दृष्टि से महाविद्यालय में प्रशिक्षणार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु वर्ष भर विविध गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं। राष्ट्रीय सेवा योजना, खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं कौशल विकास से जुड़ी प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रशिक्षणार्थियों को अपनी प्रतिभा अभिव्यक्त करने और निखारने के पर्याप्त अवसर प्रदान किए जाते हैं।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि हमारे प्रशिक्षणार्थी भविष्य में प्रबुद्ध, राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत तथा बहुआयामी कौशलों से युक्त आदर्श शिक्षक बनेंगे और समाज व राष्ट्र के विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभाकर अपने जीवन को सार्थक बनाएँगे।
भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए महाविद्यालय शैक्षिक नवाचार, कौशल विकास एवं रोजगारोन्मुखी दृष्टिकोण को अपनाकर शिक्षक शिक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अग्रसर है।
मैं इस महाविद्यालय में अध्ययनरत समस्त प्रशिक्षणार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना करती हूँ।
डाॅ. योगिता सोमानी
प्राचार्य
सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय ज्ञान, संस्कार और सेवा के समन्वय का प्रतीक है। हमारा उद्देश्य शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता, नवाचार और मानवीय मूल्यों को प्रोत्साहित करना है। हमारा कर्तव्य है कि ऐसे भावी शिक्षकों एवं जागरूक नागरिकों का निर्माण करना, जो ज्ञान, मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व से युक्त हों। हमारा विश्वास है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही समाज के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम है।
महाविद्यालय में प्रशिक्षणार्थियों को अनुकूल शैक्षणिक वातावरण, आधुनिक शिक्षण विधियों, तकनीकी संसाधनों, सह-शैक्षणिक गतिविधियों एवं अनुभवी शिक्षकगण के माध्यम से प्रशिक्षणार्थियों को व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान किया जाता है। आज के बदलते शैक्षिक परिदृश्य में शिक्षक शिक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए महाविद्यालय में नैतिक मूल्यों, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता एवं व्यावहारिक दक्षताओं के विकास पर विशेष बल दिया जाता है, जिससे प्रशिक्षणार्थी भविष्य में एक कुशल, संवेदनशील और प्रेरणादायी शिक्षक के रूप में समाज को दिशा दे सकें।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय के प्रशिक्षणार्थी शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देंगे और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। मैं समस्त प्रशिक्षणार्थियों के उज्ज्वल भविष्य हेतु हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ।
अशोक कुमार पारीख
सचिव भारतीय आदर्श शिक्षण समिति, मंदसौर (म.प्र.)
Young people have been 'mis-sold' path to success, business leaders warn.